
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भागीरथपुरा इलाके में जहरीला पानी पीने से अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1400 से ज्यादा लोग बीमार बताए जा रहे हैं। बीते 24 घंटों में ही करीब 300 नए मरीज सामने आए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने कुछ अधिकारियों को सस्पेंड किया है, वहीं आज इस पूरे प्रकरण पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है।
Lab Report में बड़ा खुलासा
अब इस मामले में मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट सामने आ चुकी है, जिसने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। इंदौर के CMHO डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने पुष्टि की कि पीने का पानी पाइपलाइन लीकेज के कारण दूषित हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, गंदा पानी सीधे सप्लाई लाइन में मिला, जिससे लोगों के घरों तक जहरीला पानी पहुंचा।
शौचालय, लीकेज और लापरवाही का घातक कनेक्शन
जांच में सामने आया है कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास पानी की पाइपलाइन में लीकेज था। उसी स्थान के पास शौचालय और भारी गंदगी मौजूद थी। यही गंदगी लीकेज के जरिए पेयजल लाइन में मिल गई।
जहां पुलिस चौकी थी, वहीं सिस्टम नींद में था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार पार्षद और नगर निगम से शिकायत की, लेकिन न कोई निरीक्षण हुआ, न मरम्मत। नतीजा
लापरवाही ने लोगों की जिंदगी निगल ली।
मौतों का आंकड़ा: प्रशासन बनाम ज़मीनी हकीकत
जहां प्रशासन केवल 4 मौतों की पुष्टि कर रहा है, वहीं कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहले ही स्वीकार कर चुके हैं कि 1400 से ज्यादा लोग बीमार हुए हैं।

यह अंतर खुद सवाल खड़े करता है— क्या आंकड़े भी फिल्टर किए जा रहे हैं?
High Court और NHRC सख्त
इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की है। वहीं, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट आज इस मामले की सुनवाई करेगा। जबलपुर की दो सदस्यीय पीठ, ऑनलाइन सुनवाई, सरकार से स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है।
“स्वच्छ शहर” टैग पर सवाल
इंदौर को लगातार कई सालों से देश का सबसे स्वच्छ शहर चुना जाता रहा है। लेकिन यह हादसा एक कड़वा सवाल छोड़ गया है— क्या स्वच्छता सिर्फ सड़कों और रैंकिंग तक सीमित है? या फिर नलों से आने वाला पानी भी इसमें शामिल होना चाहिए?
भागीरथपुरा की यह त्रासदी सिस्टम की लापरवाही, निगरानी की नाकामी और शिकायतों की अनसुनी आवाज़ का खतरनाक परिणाम है।
अब निगाहें हाई कोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
DJ नहीं, जय श्रीराम! New Year 2026 में Youth ने चुना Spiritual Celebration
